Wednesday, 7 August 2013
आज की राजनीति...
नमस्कार ...
आज की राजनीति जिस तरह हो रही है बड़ा दुख होता है कुछ ऐसे लोग यहा पर है ...सायद इनकी ज़रूरत यहा नही है...और जहा होनी चाहिए वहा ये लोग है नही| मतलब कई सारे सरकारी कार्यालय मे चपरासी टाइप की जगह होती है ...वहा के लायक है ऐसे लोग ....इनसे बेहतर काम तो चपरासी भी कर लेंगे....अब जनता का भी कम दोष नही है.....जाति ,धर्म के नाम पर ऐसे जाहिल लोगो को चुनती है और ...फिर 5 साल प्यार मे धोखा खाए प्रेमी/प्रेमिका की तरह रोती है..... ये लोग किसी का भला नही कर सकते ..इतना तो आप जानते ही है.....तो इंसानियत जो दिखाई देती है वह लोगो को दिखती नही.... मानता हू जाति, धर्म हर किसी का अपना मामला है.....पर विकाश के मामले मे आप ऐसा ना सोचे की आप की जाति वाला विकाश करेगा....वैसे तो बहुत सारी पार्टिया जाति विशेष के लोगो को बुला करके सम्मेलन करती है....लेकिन जैसा करना चाहिए वैसा नही होता....और यदि राजनीति से प्रेरित होकर करते है और अपनी योजनाओ के बारे मे बेहतर से बताना चाहते है तो सबको बुलाओ......सभी ने वोट दिया है....पर ये बाते लोगो के दिमाग़ मे नही जा सकती .....खैर ये कब बदलेंगे कुछ कह नही सकता ...पर सबसे पहले सभी जनता को बदलना होगा......बेहतर इंसान को वोट दे....किसी भी जाति का हो.....जाती का लेबेल...शो नही करता है.....कर्म पर ध्यान दो......वैसे हज़ारो पीढ़िया जाति और इन्ही तरह की बेवकूफी भारी बातो मे अपना आधा जीवन बर्बाद किया....पर अब तो समझो.....परिवर्तन होना चाहिए...
कही पढ़ा था ये लाइन हमने.....
"जब सभी नालयक हो,जाहिल हो,,,तब मजबूरी ये होती है की इन सबमे सबसे कम नालयक और जाहिल इंसान को चुना जाए,,कुछ तो बेहतर करेगा सायद आज की राजनीति मे यही हो रहा है"पर उठो जागो और कुछ करो हम सभी की ज़िम्मेदारी है ये की ऐसे जाहिल लोगो को इनकी सही जगह मे भेजे| ये लोग राजनीति का मतलब नही समझते|
राजनीति तो एक जज़्बा है,
सभी को बेहतर जिंदगी देने का,
देश को विकाश के पथ पर ले जाने का,
सभी को साथ ले कर चलने का|
ये बाते होनी थी हमारे नेताओ के अंदर...पर नही ये ऐसे बन ना सके|
पर सवेरा होगा बहुत जल्द......
© N.Rahul Kumar
Friday, 12 July 2013
mai दूर गगन मे रहता हू,
mai दूर गगन मे रहता हू,
जाने क्यो mai डरता हू,
इस जाहिलता की दुनिया मे,
बाँध ना दे मुझको,
धर्म , जाति की जंजीरो मे,
mai दूर गगन मे रहता हू,
जाने क्यो mai डरता हू,|
@राहुल
जाने क्यो mai डरता हू,
इस जाहिलता की दुनिया मे,
बाँध ना दे मुझको,
धर्म , जाति की जंजीरो मे,
mai दूर गगन मे रहता हू,
जाने क्यो mai डरता हू,|
@राहुल
Friday, 28 June 2013
कुछ लोग होते है ऐसे,
कुछ लोग होते है ऐसे,
जो कुछ वो कह दे,
वही सही हो जाए,पर कुछ तो सुनो दूसरो की भी,
वो कुछ क्या कहना चाहे,
पर कुछ जाहिल लोग जहा मे,
ऐसा कभी नही करते है यारो,
उम्र बढ़ने से कोई ,
काबिल कभी हुआ नही है,
कुछ लोग होते है ऐसे,..?
डिग्री, डिप्लोमा लेने से,
कोई काबिल हुआ नही है,ये तो बस पैमाना है ,
जिंदगी मे कुछ हासिल करने का,
जिंदगी की राह चलाने का,
,कितनी इंसानियत है ,
आप के अंदर,
यही मायने रखता है,
हर कोई कुछ सीखे आपसे,
हरपल और बनना चाहे ,
आप के जैसा,तब समझना कितने बेहतर है आप.
--राहुल
जो कुछ वो कह दे,
वही सही हो जाए,पर कुछ तो सुनो दूसरो की भी,
वो कुछ क्या कहना चाहे,
पर कुछ जाहिल लोग जहा मे,
ऐसा कभी नही करते है यारो,
उम्र बढ़ने से कोई ,
काबिल कभी हुआ नही है,
कुछ लोग होते है ऐसे,..?
डिग्री, डिप्लोमा लेने से,
कोई काबिल हुआ नही है,ये तो बस पैमाना है ,
जिंदगी मे कुछ हासिल करने का,
जिंदगी की राह चलाने का,
,कितनी इंसानियत है ,
आप के अंदर,
यही मायने रखता है,
हर कोई कुछ सीखे आपसे,
हरपल और बनना चाहे ,
आप के जैसा,तब समझना कितने बेहतर है आप.
--राहुल
Thursday, 27 June 2013
बात बन जाए तो...
बात बन जाए तो ,
सपने सच होने लगे,
राह मिल जाए तो ,
मंज़िल पास होने लगे,
दिल मिल जाए तो,
प्यार भी होने लगे,
बात बन जाए तो ,
सपने सच होने लगे,
विचार मिल जाए तो,
दुनिया बेहतर होने लगे,
टूट जाए धर्म, जाति की बेड़िया,
गर इंसानियत फिर होने लगे,
बात बन जाए तो ,
सपने सच होने लगे - राहुल
सपने सच होने लगे,
राह मिल जाए तो ,
मंज़िल पास होने लगे,
दिल मिल जाए तो,
प्यार भी होने लगे,
बात बन जाए तो ,
सपने सच होने लगे,
विचार मिल जाए तो,
दुनिया बेहतर होने लगे,
टूट जाए धर्म, जाति की बेड़िया,
गर इंसानियत फिर होने लगे,
बात बन जाए तो ,
सपने सच होने लगे - राहुल
Tuesday, 25 June 2013
Remove social problems
Sabhi logo ko samaj ki kamiya acchi nahi lagti aur espar gyan dene walo ki kami nahi hai...par ap kitna sahyog dete hai cheeze behtar banane me....sayad bahut kam log honge?...jo log aisi bate karte hai wahi offices me apna kam jaldi ho jaye 50-100 rs ki beth dete hai....aakhir yeh bhi BHRASTACHAR bada raha hai....aur badi karte hai....to esliye sankalp lenge aj nahi to kal apka GHAR,SAMAJ AUR DESH BEHTAR HOGA...... -Rahul
उत्तराखंड, आपदा और इंसान
उत्तराखंड मे जो आपदा आई है ....बहुत दुखद है और इतने सारे लोगो का जीवन ख़त्म हो गया...कितना दुखद समय है उनके परिवार और देश के सभी लोगो के लिए.पर इस सब को भगवान की तरफ से उठाया कदम नही मानना चाहिए, बेलगाम विकाश,अंधाधुंध प्रक्रति का दोहन इन सब के पीछे कुछ इंसान ही ज़िम्मेदार है...अफ़सोस की बेकसूर लोगो की जिंदगिया तबाह हो जाती है. सरकार भी कम दोषी नही है बिना किसी नियम क़ानून के काम, इतने धार्मिक स्थल और भक्तो की बेतहासा भीड़ ....और संवेदनशील इलाक़ा ....और आपदा से निपटने के लिए कोई बंदोबस्त नही....क्या सब चीज़ भगवान भरोसे करना सही है? आशा करते है अब कुछ हमारे ज़िम्मेदार लोग समझेंगे...अमरनाथ जैसे नियम और हर भक्तो का पंजीकरण करना ज़रूरी होना चाहिए और वहा पर व्यवस्था के हिसाब से ही लोगो को भेजना चाहिए...जिससे की आगे ऐसी घटना मे लोगो को अपनी
कीमती जान ना गवनी पड़े|
राहुल rahul089@in.com
फोटो गूगल के सौजन्य से
कीमती जान ना गवनी पड़े|
राहुल rahul089@in.com
फोटो गूगल के सौजन्य से
Monday, 24 June 2013
प्रक्रति के साथ ..और दोहन अब नही|
प्रक्रति के साथ किये गये का बर्ताव है उत्तराखंड की आपदा।..अब भी ना सुधरे तो कुछ नहीं हो सकता ...विकाश के नाम पर होता प्रक्रति का दोहन , बिना किसी मानक के भवनो का निर्माण । प्रक्रति के द्वारा सजा तो मिलनी ही थी।..बस अफसोस की बेगुनाह लोगो को काल का ग्रास बनना पड़ा..कुछ लोगो की वजह से। -राहुल rahul089@in.com
Thursday, 20 June 2013
पानी की बर्बादी अब और नही...
जिंदगी मे जो भी चीज़े है उनका एक आधार है दुनिया मे विकसित कोई भी सभ्यता हो| सबके पीछे नदियो का बहुत बड़ा योगदान है जी हा हम बात कर रहे है पानी की इसके बिना जीवन संभव नही और दुनिया मे कई ऐसे इलाक़े है जहा लोगो को सारा दिन पानी के लिए परेशान होना पड़ता है तथा जिंदगी मे वह कोई बेहतर मुकाम नही बना पाते|फिर भी जहा पानी है सभी के लिए वहा पर लोग जिस तरह से पानी बर्बाद करते है...बड़ी दुख की बात है|ऐसा नही है की लोग पढ़े लिखे नही है किसी बात की जानकारी नही है...पर पढ़े लिखे और अपने को बेहतर समझने वाले लोग ही ऐसा काम अधिक करते है |पानी की टंकी भर गयी है पर जब तक २० मिनिट तक पानी बहा नही लेंगे तब तक बेहतर इंसान कैसे कहलाएँगे,ब्रश करने मे जहा एक मग पानी लगेगा पर बाल्टी भर से कम खर्च नही करेंगे तो काम कैसा चलेगा |अब यहा पर ऐसे लोगो से आप कुछ कहेंगे तो तर्क देंगे भूल गये...एक बार घड़ी से टाइम देख ले की कितने समय मे आपकी टंकी भर जाती है तो उतने समय मे आप हर बार मोटर बंद कर देंगे जिससे की बिजली और पानी दोनो की बचत हो सके| आप कल्पना कर सकते है यदि हर घर से १ मिनट ही पानी बहा तो एक राज्य के सभी सहरो और गाओ को मिलकर देखेंगे तो कितना पानी बर्बाद हुया...आप समझ सकते है? और जैसे हम सभी लोग धर्म की महत्ता और भगवान की महत्ता सभी को बताते है अब समय आ गया है की पानी को भी भगवान की तरह पूजे और सही से प्रयोग करे|हम तभी भगवान और धर्म को कायम रख पाएँगे जब इंसान होंगे यानी पानी होगा बिन पानी सब सूना यह तो आप सभी लोग जानते ही है? तो कॉसिश करिए पानी का एक बूँध भी बर्बाद ना होने पाए और अन्या लोगो को भी जागरूक करिए .जिससे की हम इस जीवन रक्षक पानी को आगे भी बनाए रखे और इस सुंदर जहा मे जीवन यू ही आगे बढ़ता रहे| यह हम सभी की ज़िम्मेदारी है और इसको मिलकर ही पूरा किया जा सकता है|
-राहुल अभिनीत कुमार rahul089@in.com
-राहुल अभिनीत कुमार rahul089@in.com
Wednesday, 19 June 2013
मै उलझा
मै उलझा हू जमाने की बेवकूफी पर,,,,एक तरफ विकाश हो रहा है लोग चांद पर जाने की कोसिश कर रहे है और चले भी गये है| ....और एक तरफ अभी लोग जाति और धर्म से ही नहीं उबर पाये है.
Friday, 7 June 2013
प्रेम और विस्वाश
किसी भी सम्बंध का मतलब क्या रह जाता है .....जहा प्रेम और विस्वाश नहीं .....यही बात हमारे विवाह सम्बंधो मे भी लागू होती है.... -राहुल rahul089@in.com
आसा नही डगर पर मंज़िल पाने का जज़्बा हमारा है|
आसा नही डगर पर मंज़िल पाने का जज़्बा हमारा है,
रास्ता कठिन पर सही राह पर जाने का जज़्बा हमारा है,
आसा नही डगर पर मंज़िल पाने का जज़्बा हमारा है,
मंज़िल आज नही तो कल मिल जाने का जज़्बा हमारा है,
आसा नही डगर पर मंज़ल पाने का जज़्बा हमारा है,
तोड़े देंगे बेड़िया जुर्म की अगर साथ आप सबका है,
आसा नही डगर पर मंज़ल पाने का जज़्बा हमारा है,
सबको दिखा देंगे अगर विशवाश हो तो हर काम आसा हमारा है
आसा नही डगर पर मंज़िल पाने का जज़्बा हमारा है,
रास्ता कठिन सही पर सही रह पर जाने का जज़्बा हमारा है,
काम कठिन है उनका यह कहने से कोई काम नही रुकने वाला है,
दिखा देंगे उनको भी करना चाहे तो हर काम हो ही जाना है
आसा नही डगर पर मंज़िल पाने का जज़्बा हमारा है,,
पग-पग चलने से कोसो दूर मंज़िल मिल जाती है,
करना है हमको यह काम, यदि जज़्बा यह हमारा है तो,
हर मंज़िल तक हमको पहुच ही जाना है,
आसा नही डगर पर मंज़िल पाने का जज़्बा हमारा है,
रास्ता कठिन पर सही राह पर जाने का जज़्बा हमारा है,
आप देंगे साथ तो बदल देंगे समाज का नज़ारा ,
यह वादा आपसे हमारा है,
आसा नही डगर पर मंज़ल पाने का जज़्बा हमारा है|
- राहुल अभिनीत कुमार rahul089@in.com
रास्ता कठिन पर सही राह पर जाने का जज़्बा हमारा है,
आसा नही डगर पर मंज़िल पाने का जज़्बा हमारा है,
मंज़िल आज नही तो कल मिल जाने का जज़्बा हमारा है,
आसा नही डगर पर मंज़ल पाने का जज़्बा हमारा है,
तोड़े देंगे बेड़िया जुर्म की अगर साथ आप सबका है,
आसा नही डगर पर मंज़ल पाने का जज़्बा हमारा है,
सबको दिखा देंगे अगर विशवाश हो तो हर काम आसा हमारा है
आसा नही डगर पर मंज़िल पाने का जज़्बा हमारा है,
रास्ता कठिन सही पर सही रह पर जाने का जज़्बा हमारा है,
काम कठिन है उनका यह कहने से कोई काम नही रुकने वाला है,
दिखा देंगे उनको भी करना चाहे तो हर काम हो ही जाना है
आसा नही डगर पर मंज़िल पाने का जज़्बा हमारा है,,
पग-पग चलने से कोसो दूर मंज़िल मिल जाती है,
करना है हमको यह काम, यदि जज़्बा यह हमारा है तो,
हर मंज़िल तक हमको पहुच ही जाना है,
आसा नही डगर पर मंज़िल पाने का जज़्बा हमारा है,
रास्ता कठिन पर सही राह पर जाने का जज़्बा हमारा है,
आप देंगे साथ तो बदल देंगे समाज का नज़ारा ,
यह वादा आपसे हमारा है,
आसा नही डगर पर मंज़ल पाने का जज़्बा हमारा है|
- राहुल अभिनीत कुमार rahul089@in.com
Thursday, 6 June 2013
क्या हम सब ऐसे ही है?
“सभ्य” यह सब्द ऐसा है जो दो सभ्यताओ, संस्कृति को, काफ़ी अलग करता है| इंसानो को जानवर से अलग करता है|
वैसे इंसान का दिमाग़ ही है जो उसको सबसे अलग करता है और आज जो इतना विकास है सब उसी का कमाल है पर अफ़सोश यह सभी मे नही आ पाया …पर १००% तो कुछ होता ही नही है….और कब कहा कैसे जो तोड़ा बहुत है वह भी कुछ लोगो को नही मालूम | कैसे प्रयोग करे|
मुझे उन लोगो से परेसानी है जो, अपने घर के बाहर भी अपनी बेवकूफी का परिचय देते है.घर वालो तो परेशान होते ही होंगे..बसो मे ,ऑटो मे गंदगी करते रहते है ,,,पान-मसाला खाकर थूकना ..बिना किसी की परवाह किए हुवे ,,किसी को परेसानी हो सकती है .. वैसे तो इतना दिमाग़ तो होना ही चाहिए जो हमारे सुविधा के लिए चीज़े है उनको सही से रखे |
और हा अगर आप ने ग़लती से उनको टोक दिया तो उल्टा आप को ही समझाने लगेंगे ..इन कामो मे ऐसा नही है की कम पढ़े-लिखे लोग सामिल होते है …हाइली quilified लोग सामिल होते है स्कूल जाने वाले हमारे होनहार युवा भी कुछ सामिल होते है.. यही सीखते है…..या manners सीखना ही नही चाहते है|
mai तो कहता हू बस थोड़ी सी कल्पना करे यदि mai आप के घर आउ और आप के कमरे मे थूकना शुरू तो कैसा लगेगा|
इस का उत्तर क्या होगा आप जानते है? तो घर की तरह ही बसो मे .ऑटो मे,ट्रेन मे, स्कूल मे,ऑफीस मे,सड़को मे ..यह सब आप के लिए ही है और इसकी ज़िम्मेदारी भी हम सबकी है|
तो “सभ्य” सब्द का सही से अपने जीवन मे प्रयोग करे ..केवल कॉलेज जाने, बड़ी-बड़ी बाते करने से कुछ नही होता ..अपने अंदर सभ्यता लाए …और सही तरीका तो यह है कि यदि आप पान मसाला खाते है तो जब आप यात्रा करे तो कुछ समय के लिए तो बंद कर सकते है,और सड़को मे चलते है तो उचित जगह पर थुके …आप ऐसा करेंगे तो और जब कोई जैसा पहले आप करते थे|..करेगा तो किसी को जो समस्या होती है …समझ पाएँगे|
वैसे इंसान का दिमाग़ ही है जो उसको सबसे अलग करता है और आज जो इतना विकास है सब उसी का कमाल है पर अफ़सोश यह सभी मे नही आ पाया …पर १००% तो कुछ होता ही नही है….और कब कहा कैसे जो तोड़ा बहुत है वह भी कुछ लोगो को नही मालूम | कैसे प्रयोग करे|
मुझे उन लोगो से परेसानी है जो, अपने घर के बाहर भी अपनी बेवकूफी का परिचय देते है.घर वालो तो परेशान होते ही होंगे..बसो मे ,ऑटो मे गंदगी करते रहते है ,,,पान-मसाला खाकर थूकना ..बिना किसी की परवाह किए हुवे ,,किसी को परेसानी हो सकती है .. वैसे तो इतना दिमाग़ तो होना ही चाहिए जो हमारे सुविधा के लिए चीज़े है उनको सही से रखे |
और हा अगर आप ने ग़लती से उनको टोक दिया तो उल्टा आप को ही समझाने लगेंगे ..इन कामो मे ऐसा नही है की कम पढ़े-लिखे लोग सामिल होते है …हाइली quilified लोग सामिल होते है स्कूल जाने वाले हमारे होनहार युवा भी कुछ सामिल होते है.. यही सीखते है…..या manners सीखना ही नही चाहते है|
mai तो कहता हू बस थोड़ी सी कल्पना करे यदि mai आप के घर आउ और आप के कमरे मे थूकना शुरू तो कैसा लगेगा|
इस का उत्तर क्या होगा आप जानते है? तो घर की तरह ही बसो मे .ऑटो मे,ट्रेन मे, स्कूल मे,ऑफीस मे,सड़को मे ..यह सब आप के लिए ही है और इसकी ज़िम्मेदारी भी हम सबकी है|
तो “सभ्य” सब्द का सही से अपने जीवन मे प्रयोग करे ..केवल कॉलेज जाने, बड़ी-बड़ी बाते करने से कुछ नही होता ..अपने अंदर सभ्यता लाए …और सही तरीका तो यह है कि यदि आप पान मसाला खाते है तो जब आप यात्रा करे तो कुछ समय के लिए तो बंद कर सकते है,और सड़को मे चलते है तो उचित जगह पर थुके …आप ऐसा करेंगे तो और जब कोई जैसा पहले आप करते थे|..करेगा तो किसी को जो समस्या होती है …समझ पाएँगे|
-राहुल rahul089@in.com
आखिर क्या कर रहे है,कुछ तो सोचो ?
अजीब विडंबना है की हम लोग चाहते है|कि सब कुछ सही हो, गवर्नमेंट ये नही करती , पानी की समस्या है,सड़को मे जाम है, भ्रास्ताचार बढ़ रहा है, बिना पैसे के काम नही होता है,,,,,,,,ना जाने ऐसी कितनी बाते है,,,,,,पर आप कभी ये सोचते है कि हम कितना सहयोग दे रहे है सब बात को सुधारने मे………..सायद उत्तर.10% से भी कम हो….कोई कुछ करना चाहता ही..नही,,,यहा सब केवल उम्मीद पर रहते है या भगवान भरोसे,,,यह सब तब तक नही बदलेगा जब तक सब लोग साथ नही सोचेंगे इस दिसा मे….सिर्फ़ सोचे ही ना उसको पर्दे पर उतारना भी है|
कोई यातायात नियम फॉलो नही करता बत्ती जलने से पहले ही खुद बढ़ते रहते है बिना किसी की परवाह किए और यहा वही लोग सामिल है जो समझते है की हम काफ़ी काबिल है पर सच्चाई यह है की सबसे बड़े जाहिल वही है ,,,,,,,,खुद ग़लत काम करते है और फिर बड़ी-2 बाते करते है| सोचिए और काफ़ी कुछ बदल सकते है हम सब लोग| और परिणाम आप के सामने होगा? और इसके लिए आज जो हो रहा है | यदि सब लोग अपनी ज़िम्मेदारी समझे तो ना किसी को अनसन मे बैठना पड़ेगा ना रैलिया निकालनी पड़ेगी?
-राहुल rahul089@in.com
कोई यातायात नियम फॉलो नही करता बत्ती जलने से पहले ही खुद बढ़ते रहते है बिना किसी की परवाह किए और यहा वही लोग सामिल है जो समझते है की हम काफ़ी काबिल है पर सच्चाई यह है की सबसे बड़े जाहिल वही है ,,,,,,,,खुद ग़लत काम करते है और फिर बड़ी-2 बाते करते है| सोचिए और काफ़ी कुछ बदल सकते है हम सब लोग| और परिणाम आप के सामने होगा? और इसके लिए आज जो हो रहा है | यदि सब लोग अपनी ज़िम्मेदारी समझे तो ना किसी को अनसन मे बैठना पड़ेगा ना रैलिया निकालनी पड़ेगी?
-राहुल rahul089@in.com
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