राजनीति के अब मायने बदल गये,
कभी
जज़्बा होता था देश की सेवा का,
लोगो के
विसवॉश का,
लोगो के
ज़ज्बात का,
विकाश
की हर बात का,
अपनो के
साथ का,
पर क्या से क्या हो गया,
उलझे है
आपस मे ही,
खीचतान
जारी है,
आरोप
प्रत्यारोप भारी है,
इन सबके
बीच पिसती जनता बारी-बारी है,
विकाश
सब्द होता है बस इनकी बातो मे,
ये तो
सब उलझे है जाति धर्म की नीति मे,
इतनी वोट इस जाती से,
इतनी
वोट इस धर्म से,
इतनी
गिरी राजनीति के चक्कर मे,
मानवता
को भूले है,
कब कोई
इधर है, कब कोई उधर है,
जब खुद
का ही कोई आधार नही,
क्या
विकाश का काम करेंगे,
बस
मरेंगे जनता के विसवॉश को,
अब भी देर नही है,
उठो सभी
जागो सभी,
अपने
अधिकार का प्रयोग करो,
बेहतर
उम्मीदवार को मतदान करो,
दूर भगा
दो उनको ,
जो जनता
को उलझाते है,
जाति
धर्म की बातो मे,
विकाश होता है बेहतर लोगो से,
कुछ
बेहतर करने की धुन से,
सबको
साथ लेकर चलने से,
मानवता
की बात करने से,
विकाश
होता हम सब से,
हम सब
की शक्ति से,
-राहुल कुमार

